
लेखक एवं उद्देश्य
विकास जैन
यह मंच केवल मेरे विचारों का नहीं, बल्कि हमारी साझा वैचारिक क्रांति का है।
मेरा मानना है कि ‘जैनी’ होने से पहले ‘जैन दर्शन’ को समझना अनिवार्य है। जब तक हम अपने आगमों की स्याही को आज के जीवन के संदर्भ में डिकोड नहीं करेंगे, तब तक वह ज्ञान केवल अलमारियों की शोभा बना रहेगा।
इस मंच का उद्देश्य
- पाखंड से मुक्ति — धर्म के नाम पर फैली कुरीतियों और प्रदर्शनवाद पर चोट, जो हमें मूल तत्व से दूर ले जाते हैं।
- आगम का सरलीकरण — प्राचीन आगम साहित्य की गूढ़ बातों को आज की भाषा और आज की समस्याओं के समाधान के रूप में प्रस्तुत करना।
- विवेकपूर्ण चर्चा — क्रियाकांड के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझना और जहाँ केवल लकीर पीटी जा रही है, वहाँ प्रश्न खड़े करना।
- युवा पीढ़ी से संवाद — नई पीढ़ी को यह बताना कि महावीर का दर्शन आउटडेटेड नहीं, बल्कि अपडेटेड जीवन जीने की कला है।
आइए, महावीर के दर्शन को संप्रदायों की दीवारों से बाहर निकालकर जीवन के खुले आंगन में लेकर आएं।